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आउटसोर्स कर्मी, होमगार्ड और कृषि मित्र लड़ सकेंगे चुनाव; जानें कौन है अयोग्य

हिमाचल में शहरी निकाय चुनाव के नामांकन शुरू, पंचायत चुनाव 7 मई से
आउटसोर्स, होमगार्ड, कृषि मित्र समेत कई श्रेणियां चुनाव लड़ने के लिए पात्र
आंगनबाड़ी, मिड-डे मील वर्कर और जलरक्षक समेत कई श्रेणियां अयोग्य घोषित


हिमाचल प्रदेश में शहरी निकायों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के लिए नामांकन 7 मई से प्रारंभ होंगे। चुनावों को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और संभावित प्रत्याशियों ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। इसी बीच हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत चुनाव लड़ने की पात्रता और अपात्रता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारी, होमगार्ड, कृषि मित्र, निजी डिपो होल्डर और लंबरदार को चुनाव लड़ने के लिए पात्र माना गया है। इससे इन वर्गों से जुड़े लोगों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो गया है।

वहीं दूसरी ओर, कई श्रेणियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका, मिड-डे मील वर्कर और जलरक्षक शामिल हैं। इसके अलावा सहकारी समितियों के सेल्समैन और सेक्रेटरी भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यदि किसी व्यक्ति का मामला किसी अदालत में अपील या पुनरीक्षण के तहत लंबित है, तो वह भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा।

इसके साथ ही, अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों को लेकर भी सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। ऐसे लोग जिन्हें अतिक्रमण के कारण बेदखल किया गया है, वे कब्जा छोड़ने के बाद भी छह वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेंगे। हालांकि, जिन अतिक्रमणकारियों ने वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है, उन्हें इस नियम से राहत देते हुए पात्र माना गया है।

सबसे दिलचस्प स्थिति आशा वर्करों को लेकर बनी हुई है। फिलहाल इनके चुनाव लड़ने का मामला सरकार के विचाराधीन है। पंचायतीराज विभाग की ओर से भेजी गई फाइल में यह स्पष्ट किया गया है कि आशा वर्कर पार्टटाइम कार्यकर्ता हैं, ऐसे में इन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।

कुल मिलाकर, आगामी पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर राज्य में नियमों को स्पष्ट कर दिया गया है, जिससे संभावित उम्मीदवारों को अपनी स्थिति समझने में आसानी होगी और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी।